उम्मीद की एक किरण बनें: जब ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा शुरू होती है–
जीवन की आपाधापी में हम अक्सर भूल जाते हैं कि हमारे अस्तित्व का असली उद्देश्य क्या है। हम अपनी खुशियों, अपनी सुरक्षा और अपने भविष्य को संवारने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि सड़क के किनारे बैठा वह व्यक्ति हमें नज़र नहीं आता, जिसकी आँखों में अब उम्मीद की कोई चमक नहीं बची है।
तरंग फाउंडेशन में हमारा मानना है कि मानवता कोई शब्द नहीं, बल्कि एक एहसास है। यह वह एहसास है जो हमें दूसरों के दर्द को अपना समझने की शक्ति देता है।
नर सेवा ही नारायण सेवा है
हमारे शास्त्रों और संस्कारों में कहा गया है कि ईश्वर मंदिरों या तीर्थों में नहीं, बल्कि उस पीड़ित मनुष्य के भीतर बसता है जिसे आपकी मदद की ज़रूरत है। जब आप किसी भूखे को भोजन कराते हैं, किसी ठंड से ठिठुरते हुए व्यक्ति को कंबल देते हैं, या किसी मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति के सिर पर हाथ रखकर कहते हैं- “डरो मत, हम तुम्हारे साथ हैं,” तो उस पल आप ईश्वर की सबसे निकटतम प्रार्थना कर रहे होते हैं।
हमारा संकल्प: एक तरंग, जो बदलाव लाए
जैसे शांत पानी में एक छोटा सा कंकड़ मीलों तक लहरें (तरंगें) पैदा कर सकता है, वैसे ही आपका एक छोटा सा दयालु कदम किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
समाज के वे लोग—जो निराश्रित हैं, मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, या जिन्हें अपनों ने ठुकरा दिया है—वे हमारी दया के नहीं, हमारे प्रेम और सम्मान के हकदार हैं। तरंग फाउंडेशन का उद्देश्य केवल छत मुहैया कराना नहीं है, बल्कि उन्हें यह विश्वास दिलाना है कि वे इस दुनिया में अकेले नहीं हैं।
आप कैसे बन सकते हैं बदलाव का हिस्सा?
मानवता की सेवा के लिए बहुत ज्यादा धन की आवश्यकता नहीं होती, आवश्यकता होती है एक संवेदनशील हृदय की।
- संवेदना (Empathy) रखें: अपने आस-पास के बेसहारा लोगों को अनदेखा न करें।
- समय का दान दें: धन से भी कीमती आपका समय और सेवा है।
- जागरूक बनें: मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ आवाज़ उठाएं।
निष्कर्ष
आइए, आज एक संकल्प लें। हम सिर्फ अपने लिए नहीं जिएंगे। हम किसी के चेहरे की मुस्कान बनेंगे। हम किसी अंधेरी ज़िंदगी में रोशनी की ‘तरंग’ बनेंगे।
याद रखिये, दीपक बोलता नहीं है, उसका प्रकाश उसका परिचय देता है। ठीक उसी तरह, आपकी निस्वार्थ सेवा ही आपकी असली पहचान है।
जुड़ें तरंग फाउंडेशन के साथ और मानवता की इस यात्रा में कदम से कदम मिलाएं।
“किसी के जख्म पर चाहत की पट्टी कौन बांधेगा,
अगर हम न होंगे तो मानवता को कौन संभालेगा?”

Hi, this is a comment.
To get started with moderating, editing, and deleting comments, please visit the Comments screen in the dashboard.
Commenter avatars come from Gravatar.